‘सोफ्ट रोबोट’ दिल के मरीज के लिए वरदान बनेगा

हार्वर्ड युनिवर्सिटी तथा बोस्टन चिल्ड्रन होस्पिटल ने ‘सोफ्ट रोबोट’ का आविष्कार किया है, जिससे हार्ट-अटेक के बाद भी मरीज को बचाया जा सकेगा। अब तक हार्ट के अंंदर एक मिकेनिकल डिवाईस को स्थापित करने कि तकनिक से विपरित, यह डिवाईस हार्ट की बाहरी सतह पर लगाया जाता है। जो खून के बहाव तथा रक्तवाहिनीओंं की कार्यशिलता बढाने मे मदद करता है। हार्ट निष्क्रिय हो जाने के बाद भी उसमे थोडी कार्यक्षमता बची होती है। रोबोट स्लीव लगाने के बाद फिर से कार्यरत हो जायेगा और मरीज अपनी रोजाना जिन्दगी मे लौट सकेगा।

यह डिवाईस हार्ट की रचना से प्रेरित है। हाल ही मे संंशोधित सोफ्ट रोबोट तकनिक से हार्ट के चारो ओर एक सिलिकोन स्लीव लपेट दी जाती है। इस स्लीव मे लगे खास ट्यूब फैलकर और सिकुडकर हार्ट को ज्यादा कार्यक्षम बनायेगी।


प्राथमिक तौर पर इसका प्रयोग एक सुवर के उपर किया गया। मेडिसीन देकर सुवर के हार्ट की क्षमता 45 प्रतिशत तक घटा दी गई। उसके बाद रोबोटिक स्लीव लगाकर हार्ट को 97 प्रतिशत तक कार्यक्षमता बढाई गई। इस सफल परीक्षण से दुनिया मे 1,40,000 से ज्यादा हार्ट-फेल्योर के मरीजो मे आशा की किरण जगी है। हालाकि सुवर पर सफल परीक्षण के बाद भी मानवशरीर के लिए यह प्राथमिक स्टेज है।

Source: Science Translational Medicine

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