चिंटियां उलटे पांव चलते हुए भी रास्ता ढुंढ लेती है !!!

संशोधको की एक टीम ने बताया है कि चिंटियां किसी भी दिशा मे अपना मुंह रखकर चले, फिर भी अपना रास्ता ढुंढ लेती है। चिंटीयों का दिमाग पीन की नोंक जीतना छोटा होता है, मगर वे बहुत ही अच्छी नेविगेटर होती है। वे अपने रास्ते मे आनेवाले आकाशीय ओर जमीनी चिह्नो को याद रखती है। इसके लिए वे अपने दिमाग के कई हिस्सो को एकसाथ काम मे लगाती है। इस तरह कीडो का दिमाग हमारी सोच से कई ज्यादा जटिल होता है।

अब तक यह जानकारी थी कि चिंटियां अपना रास्ते के द्रश्य बहुमुखी रेटिना मे संगृहित करती है। जिससे दूसरी बार वे उसी रास्ते पर चलती है। मगर इस परिकल्पना मे उन्हे उसी रास्ते पर चलने के लिए आगे की ओर मुंह रखकर चलना पडता है। हमने देखा है कि भार वहन करते समय कई बार चिंटियो को उलटे पांव चलकर खींचना पडता है। फिर भी चिंटी अपने रास्ते को ढुंढ लेती है। तो क्या चिंटी उलटे पांव चलते हुए भी अपना रास्ता पहचान सकती है?

इसका जवाब पाने के लिए संशोधको ने रेगिस्तान कि चिंटी पर प्रयोग किया। प्रारंभ मे चिंटी को एक रास्ते पर चलाय गया जो 90 डिग्री तक मूडा हुआ था। इसके बाद एक बिस्किट का छोटा टुकडा दिया गया, जो इतना हलका था की उसे आगे चलकर ढो सके। चिंटी बिना कोई मुश्किल अपने  फिर एक बडा और भारी टुकडा दिया गया। चिटी उलटे पांव खींचते हुए टुकडे को अपने स्थान पर ले जा सकी।

इस दौरान एक अप्रत्याशित व्यवहार भी देखने को मिला। उलटे पांव खींचते हुए कभी कभी वे टुकडा छोडकर रास्ते की और देखकर जायजा लेती और फिर टुकडे को खींचने लगती। इसका मतलब यह है कि उन्हे अपने रेटिना मे संगृहित द्रश्यो को पहचानने के लिए सीधी दिशा में मुडना पडता है। मगर उसके बाद वे उलटे पांव चल सकती है। इस अवलोकन से पता चलता है कि यहां तीन प्रकार की स्मृतियां याद रखनी पडी – दृश्य स्मृति, नयी दिशा और टुकडा।

इसके बाद आकाशीय चिह्नो के बारे मे भी परीक्षण किया गया। जिसमे आईने की मदद से सूर्यप्रकाश की दिशा बदली गई। इसबार भी चिंटी अपना रास्ता याद रखने मे सफल रही। इस नयी जानकारी से पता चला की चिटियां अपना रास्ता याद रखने के लिए अपने दिमाग के अलग-अलग हिस्सो मे कई तरह के मानसिक निरूपण और स्मृतियो को बुनकर रखती है। इस जानकारी से कीडो के बारे मे संशोधन के लिए एक नया द्रष्टिकोण मिला है।

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